ये जो लफ्ज है ये कभी खत्म नही होते

,मैं लिखती रहुं पुरी जिंदगी
तुम बस ऐसे ही मेरे लिखे हुवे को महेसुस करते रहना..

मै तुझे अपने ख्वाबों का ख्याल बना लु
तुम बस इस ख्याल का ख्याल ऱखते रहना

मै तेरे  इश्क की इश्कदारीयों में अपनी जिंदगी
सवार लुं  तुम बस मुकम्मल इश्क का पैगाम मेरे लिए रखना

और फिर मुझे फिक्र नही अपनी अधुरी किस्मत की अपनी अधुरी ख्वाहिशों की तेरी बेरुखी की

बस  ख्वाहिशं है तो इतनी सी के तु मेरे लिखे हुवे को सराएं मेरी कलम को सलामी दे.......✍

मै और मेरी कलम रोज रूबरू होते है
रोज साथ में समय बिताते है....-
काश इस कलम के जैसे तु साथ हो पास हों
तो फिर मै......
इरादो की इबादत करलुँ...

ये जो लफ्ज है तेरे इश्क के है मेरे जज्बातों के है मेरे अरमानो के है तेरी बेमिसाल बेखुदी के है
ये कभी खत्म ही नही होते
जब भी लिखने बैठु तो बस सोच्चने की जरुरत ही नही पडती फिर बस लिखती रहती हु
तेरे अहसांसो को मेरे अरमानो को

अधुरे इश्क का पैगाम इश्कदारीयो का अधुरा अहसांस.... कभी ना कभी तो होगा तेरी बेरुखी का अंत
ऐ जिंदगी

तु जज्बातों का सिलसिला है
तु खामोशियां का यकिन है

Zazbat sayari
Pegam two lines sayari

Posted on :  9.april.2017
Twitter on: @mona_khaan

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About mona khaan

Hi I am Mona Khan. Am a blogger and I write about life,love poetry true story Urdu poems and friendship and also wrote about importance of a girl child in humans life.It was liked by many people.Am looking forward to write more inspirational blogs by which I can give a better shape to the thoughts of our society...