गजल... must read this touching gazal

: यादों के जैसे तुम क्यों साथ दिन- रात नहीं होती
गुरुर ना करना क्या सुबह की रात नहीं होती

: वो मालिक गर ठान ले तबाह करना जो किसी को
कही  बाढ़ डूबोती है तो कहीं बरसात नहीं होती

: पल दो पल के लिए आए यह कोई आना हुआ फिर तो बरसों तक तुम ही से मुलाकात नहीं होती

: दिल को तो यह खबर जाए कि तुम्हारी आमद है नाचने लगता हूं कहीं भी चाहे बरसात नहीं होती

: हमारे मुल्क में भी तो है दिलों के कई दुश्मन
इन दिल के तो दुश्मनों की कोई जात नहीं होती

बुरे वक्त में वो भी दिखा ने लग गए हैं आंखों को
वो जिनकी आंख को मिलाने की भी औकात नहीं होती

: ऊपर आने की भी इजाजत वो तब देगा 'ए दर्दी।
जब तक नीचे सिफर की वाकयात नहीं होती!

#गजल

Website www.monakhaan.com

: Twitter @momeenabano
Posted on 14,january,2018

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About mona khaan

Hi I am Mona Khan. Am a blogger and I write about life,love poetry true story Urdu poems and friendship and also wrote about importance of a girl child in humans life.It was liked by many people.Am looking forward to write more inspirational blogs by which I can give a better shape to the thoughts of our society...